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बेंगलुरु. देश के प्रतिष्ठित विधि संस्थानों में शामिल नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी ने 2026 में स्नातक होने वाले विद्यार्थियों का 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया है. विश्वविद्यालय ने 27 अगस्त को जारी नोटिस में समारोह रद्द करने के पीछे केवल “अपरिहार्य परिस्थितियों” का हवाला दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों के एक बड़े समूह ने प्रस्तावित दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी. समारोह पहले 12 सितंबर को प्रस्तावित था और विश्वविद्यालय ने 3 अगस्त को विद्यार्थियों को इसकी जानकारी दी थी.
विश्वविद्यालय के नए नोटिस के अनुसार अब 2026 के सभी स्नातक विद्यार्थियों को संबंधित शासी निकायों की मंजूरी के बाद बिना समारोह के ही डिग्री प्रदान की जाएगी. विद्यार्थियों को अपनी प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए दो विकल्प दिए जाएंगे. वे प्रमाण-पत्र डाक के माध्यम से मंगवा सकेंगे या फिर विश्वविद्यालय परिसर से स्वयं प्राप्त कर सकेंगे. इसके लिए विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को अलग से एक प्रपत्र और पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराएगा. इस तरह विद्यार्थियों की डिग्री पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जिस औपचारिक दीक्षांत समारोह में वे अपने परिवार और शिक्षकों के बीच डिग्री प्राप्त करने वाले थे, वह अब आयोजित नहीं होगा.
दीक्षांत समारोह रद्द किए जाने का फैसला अचानक सामने आया है. 3 अगस्त को विश्वविद्यालय के अकादमिक प्रशासन ने विद्यार्थियों को ईमेल के जरिए बताया था कि 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह 12 सितंबर को आयोजित किया जाएगा. इसके बाद सीजेआई सूर्यकांत और बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की प्रस्तावित मौजूदगी को लेकर विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों के बीच असहमति सामने आई. विरोध करने वाले समूह ने दोनों के समारोह में शामिल होने पर सवाल उठाए और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां रखीं.
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि हैदराबाद के नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यानी नालसर विश्वविद्यालय से जुड़े घटनाक्रम से भी जुड़ती है. नालसर के 2026 बैच के विद्यार्थियों ने अपने दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत की प्रस्तावित मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी. इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13 अगस्त को राज्य बार काउंसिलों को इस बैच के विद्यार्थियों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था. हालांकि कुछ ही समय बाद बीसीआई ने अपने आदेश को संशोधित कर सभी विद्यार्थियों को राज्य बार काउंसिल में नामांकन का अधिकार दे दिया. बाद में बीसीआई ने 2026 बैच के विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित कार्यवाही बंद करने की बात भी कही.
नालसर प्रकरण के बाद देश के अन्य विधि संस्थानों में भी सीजेआई की दीक्षांत समारोहों में प्रस्तावित मौजूदगी को लेकर विद्यार्थियों की आपत्तियां चर्चा का विषय बनीं. एनएलएसआईयू के विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों के एक समूह ने भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति सार्वजनिक की. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 700 से अधिक विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों ने बीसीआई अध्यक्ष और सीजेआई की प्रस्तावित मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने वाले अतिथियों को लेकर विद्यार्थियों की चिंताओं पर भी विचार किया जाना चाहिए.
विवाद के बीच एनएलएसआईयू के विद्यार्थियों की ओर से नालसर के छात्र और शिक्षक समुदाय के प्रति बीसीआई से बिना शर्त माफी की मांग भी की गई थी. विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों के एक बयान में बीसीआई की ओर से नालसर के 2026 बैच के नामांकन को रोकने के प्रयास को लेकर सवाल उठाए गए थे. इस समूह ने कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विश्वविद्यालय परिसर में असहमति के अधिकार से जोड़ते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी. रिपोर्टों के मुताबिक इस बयान पर 165 स्नातक विद्यार्थियों, 409 मौजूदा विद्यार्थियों और 128 पूर्व विद्यार्थियों के हस्ताक्षर थे.
नालसर विवाद में बीसीआई का रुख पहले काफी सख्त दिखाई दिया था. परिषद ने संबंधित विश्वविद्यालय से उन लोगों के बारे में रिपोर्ट मांगी थी, जिनके बारे में आरोप था कि उन्होंने सीजेआई की प्रस्तावित मौजूदगी के खिलाफ अभियान शुरू करने या उसे संगठित करने में भूमिका निभाई. इसी के बाद 2026 बैच के सभी विद्यार्थियों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश सामने आया. हालांकि बाद में बीसीआई ने माना कि अधिकांश विद्यार्थी इस विवाद में शामिल नहीं थे और उनके खिलाफ सामूहिक कार्रवाई उचित नहीं होगी. इसके बाद नामांकन पर रोक संबंधी आदेश संशोधित कर दिया गया.
एनएलएसआईयू में भी बढ़ते तनाव के बीच सीजेआई सूर्यकांत और विद्यार्थियों के बीच बातचीत होने की जानकारी सामने आई है. रिपोर्टों के अनुसार सीजेआई ने विद्यार्थियों के साथ करीब 90 मिनट तक बातचीत की, ताकि उनकी आपत्तियों और चिंताओं को समझा जा सके. हालांकि इस बातचीत के बावजूद दीक्षांत समारोह को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ और अंततः विश्वविद्यालय ने समारोह ही रद्द करने का फैसला किया.
विश्वविद्यालय ने अपने 27 अगस्त के नोटिस में समारोह रद्द करने का कारण विस्तार से नहीं बताया है. इसलिए यह कहना कि केवल सीजेआई की प्रस्तावित मौजूदगी के कारण ही समारोह रद्द किया गया, विश्वविद्यालय की ओर से आधिकारिक रूप से कही गई बात नहीं है. हालांकि घटनाक्रम का क्रम यही दिखाता है कि फैसला उस विवाद के बीच आया है, जिसमें सीजेआई और बीसीआई अध्यक्ष की प्रस्तावित उपस्थिति को लेकर विद्यार्थियों की ओर से विरोध सामने आया था. यही वजह है कि समारोह रद्द किए जाने के फैसले को इसी विवाद की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है.
इस फैसले से 2026 बैच के विद्यार्थियों के लिए स्थिति कुछ अलग जरूर हो गई है. सामान्य तौर पर दीक्षांत समारोह किसी भी विद्यार्थी के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण अवसर होता है. इसी समारोह में विद्यार्थी औपचारिक रूप से अपनी डिग्री प्राप्त करते हैं और परिवार, शिक्षक तथा विश्वविद्यालय समुदाय के साथ उपलब्धि का जश्न मनाते हैं. लेकिन एनएलएसआईयू के विद्यार्थियों को इस बार बिना औपचारिक समारोह के डिग्री मिलेगी. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि डिग्री प्रदान करने की प्रक्रिया शासी निकायों की आवश्यक मंजूरी के बाद पूरी की जाएगी.
इस पूरे घटनाक्रम ने देश के प्रमुख विधि संस्थानों, विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विश्वविद्यालय प्रशासन और नियामक संस्थाओं के बीच संबंधों को लेकर भी बहस तेज कर दी है. एक तरफ दीक्षांत समारोह जैसे अकादमिक अवसर पर देश के मुख्य न्यायाधीश और बीसीआई अध्यक्ष जैसे प्रमुख विधि पदाधिकारियों की मौजूदगी को संस्थागत महत्व से जोड़कर देखा जाता है, वहीं दूसरी तरफ विद्यार्थियों द्वारा अपनी असहमति दर्ज कराने का अधिकार भी इस विवाद के केंद्र में है.
एनएलएसआईयू का फैसला ऐसे समय आया है जब सीजेआई की विभिन्न विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में प्रस्तावित मौजूदगी को लेकर अलग-अलग संस्थानों में विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कुछ मामलों में अतिथि को बदलने या कार्यक्रम की रूपरेखा में बदलाव की स्थिति बनी, जबकि एनएलएसआईयू ने अपने 2026 बैच का पूरा दीक्षांत समारोह ही रद्द कर दिया.
फिलहाल एनएलएसआईयू के 2026 बैच के विद्यार्थियों को अब विश्वविद्यालय की ओर से आगे की प्रक्रिया का इंतजार रहेगा. उन्हें प्रमाण-पत्र डाक से प्राप्त करने या परिसर से लेने के लिए विकल्प दिया जाएगा. दूसरी ओर, दीक्षांत समारोह रद्द होने के फैसले ने उस विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है, जिसकी शुरुआत दूसरे विधि विश्वविद्यालय में सीजेआई की प्रस्तावित मौजूदगी को लेकर विद्यार्थियों की आपत्ति से हुई थी. विश्वविद्यालय ने भले ही अपने आधिकारिक नोटिस में केवल “अपरिहार्य परिस्थितियों” का उल्लेख किया हो, लेकिन घटनाक्रम ने देश के विधि शिक्षा जगत में विद्यार्थी असहमति, संस्थागत अधिकार और नियामक हस्तक्षेप को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस जरूर खड़ी कर दी है.

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में वर्चस्व को लेकर दो पक्षों के बीच भीषण खूनी संघर्ष का मामला सामने आया है। कनीपुरा रोड स्थित लकी ढाबे पर करणी सेना से जुड़े दो गुटों के बीच एक दर्जन से अधिक लोग आपस में भिड़ गए। इस दौरान अचानक तेज हथियारों से किए गए हमले के चलते ढाबे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस हिंसक हमले में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही चिमनगंज थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंची, हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी मौके से फरार हो गए।
दोहरे हत्याकांड में जान गंवाने वालों की पहचान निमनवासा निवासी राहुल उर्फ विजय प्रताप (पिता दिलीप सिंह) और उंडासा निवासी जितेंद्र पंवार (पिता निर्भय सिंह) के रूप में हुई है। वहीं, इस हमले में पंवासा निवासी शक्ति सिंह और पप्पू जाट गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तुरंत उपचार के लिए चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
विवाद के दौरान हमलावरों ने मौके पर खड़ी कई गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ भी की। पुलिस घटना स्थल की जांच के साथ-साथ आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों को चिन्हित कर जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके। मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई जारी है।

भिंड। मध्य प्रदेश के करप्शन के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। ताजा मामला भिंड जिले से सामने आया है। जहां एक पटवारी को पांच हजार की रिश्वत लेते पकड़ा गया है। बताया जा रहा है कि पटवारी ने नामांतरण के नाम पर 30 हजार की घूस मांगी थी। लोकायुक्त पुलिस ने घूसखोर पटवारी को गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई में जुटी हुई है।
दरअसल, 3 महीना पहले अपने सीमार गांव में अपनी पत्नी के नाम से खरीदी जमीन का शिकायतकर्ता राघवेंद्र बघेल नामांतरण कराना चाहता था। नामांतरण के एवज पटवारी संजय बघेल ने 30 हजार रुपये की डिमांड की। जिसकी शिकायत पीड़ित किसान राघवेंद्र बघेल ने ग्वालियर लोकायुक्त में की थी। शिकायत के बाद 10 हजार रिश्वत मांगने का सौदा ट्रैप हुआ। दो किस्तों में रुपए देने थे।
लोकायुक्त पुलिस ने भिंड के भारौली रोड पर स्थित ऑनलाइन दुकान पर पटवारी संजय बघेल को धर दबोचा है। पटवारी अपने निवास के नजदीक ऑनलाइन सेंटर की दुकान पर बुलाकर पहली किस्त पांच हजार रुपए ले रहा था। पटवारी संजय बघेल मेहगांव के सीमार गांव के हल्के में पदस्थ है। फिलहाल लोकायुक्त की टीम मेहगांव रेस्ट हाउस पर कार्रवाई कर रही है।

गुना। गुना कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक राजकुमार शर्मा और उनकी टीम द्वारा वीरेन्द्र नगर में रात्रि के समय सूने मकान का ताडा तोडकर की गई चोरी का खुलासा करते हुए तीन आरोपी गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी हुए चांदी के जेवर, नकदी एवं घटना में प्रयुक्त ब्रीजा कार बरामद करने सफलता प्राप्त की है ।
दिनांक 19 अगस्त 2026 को फरियादी चंद्रमोहन ओझा निवासी श्रीराम कालोनी गुना के द्वारा गुना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि गुना के वीरेन्द्र नगर में उसके भाई भरत कुमार ओझा का मकान है, दिनांक 18-19 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि में उसके भाई भरत कुमार ओझा के सूने मकान का ताला तोडकर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा घर में रखे चांदी के जेवर एवं कुछ नकदी चोरी कर लिए हैं । फरियादी की रिपोर्ट पर से गुना कोतवाली में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 486/2026 अंतर्गत धारा 331(4), 305(सी) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई ।
26 अगस्त 2026 को उक्त चोरी में संदेही तीन बदमाशों के एक ब्रीजा कार क्रमांक MP07 AK 8536 द्वारा गुना से शिवपुरी की ओर निकलने की सूचना मिलने पर गुना कोतवाली से पुलिस की एक टीम उनके पीछे रवाना हुई और बिलोनिया गांव के पास उक्त ब्रीजा कार को रोक लिया गया जिसमें सवार तीनों व्यक्तियों को हिरासत में लेकर नाम पता पूछने पर उनके द्वारा अपने नाम 1-अखिलेश पुत्र राजेश शर्मा उम्र 26 साल निवासी ग्राम देहगांव थाना मोह जिला भिंड हाल थाठीपुर ग्वालियर, 2-दशरथ पुत्र भगवानदास कुशवाह उम्र 33 साल निवासी खासाराम का पुरा थाना बानमौर जिला मुरैना हाल गणेशपुरा रोड ग्वालियर एवं 3-मुकेश पुत्र मिट्ठनलाल झा उम्र 45 साल निवासी बानमौर जिला मुरैना हाल मुरार ग्वालियर के बताए एवं आगे की पूछताछ में उनके द्वारा उक्त चोरी करना स्वीकार किया । पुलिस द्वारा आरोपियों के कब्जे से चांदी के जेबर एक ब्रेसलेट, पांच नग पायल, एक कमरपेटा, छह नग चूडी, एक चूडा कुल कीमती करीबन 01 लाख रुपये, एक हजार रुपये नकदी एवं घटना में प्रयुक्त ब्रीजा कार कीमती 09 लाख रुपये सहित लगभग 10 लाख रुपये मूल्य का मशरुका विधिवत जप्त कर प्रकरण में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया ।
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सीएमओ ने संविदा कर्मी को किया सेवा से पृथक, ...रक्षाबंधन पर्व पर 11 प्रकरण दर्ज
गुना। गुना मुख्य नगरपालिका अधिकारी शैलेष अवस्थी ने नगर पालिका परिषद गुना के संविदा/ठेका श्रमिक बृजमोहन खरे को सीएम हेल्पलाइन शिकायत के संबंध में शिकायतकर्ता से दबावपूर्ण भाषा का प्रयोग करने एवं धमकी देने के मामले में तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया है। साथ ही उनके वेतन आहरण पर भी रोक लगा दी गई है।
जारी आदेशानुसार दिनांक 19 अगस्‍त 2026 को सी०एम० हेल्पलाईन की शिकायतो को संतुष्टि उपरांत बन्द कराने हेतु श्री खरे द्वारा आवेदक विशाल भार्गव निवासी हनुमान मंदिर के पीछे भार्गव कालोनी गुना की सी०एम० हेल्पलाईन शिकायत बन्द कराने हेतु दबावपूर्ण भाषा का प्रयोग कर सीएम हेल्पलाईन शिकायत बन्द कराने हेतु कहा गया। इसके अतिरिक्‍त शिकायत नही कटवाने पर संबंधित संविदा/ठेका श्रमिक श्री खरे द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।
उक्त संपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी आवेदक द्वारा रिकार्डिंग CCTV फुटेज एवं आवेदन के साथ प्रस्तुत की गई। चुंकि शासन की सी०एम० हेल्पलाईन योजना अंतर्गतशिकायतों को शिकायतकर्ता की संतुष्ठि उपरांत ही बन्द कराने का नियम है, किन्तु श्री खरे द्वारा शिकायत को बन्द कराने के लिए शिकायतकर्ता से दबावपूर्ण भाषा का प्रयोग कर धमकी दी गई, जो निकाय द्वारा सौपें गये दायित्व एवं शासन की
महत्वपूर्ण योजना (CM HELPLINE) की मूल भावना के प्रतिकूल होकर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। जिसके चलते नगर पालिका परिषद गुना के संविदा/ठेका श्रमिक बृजमोहन खरे के विरुद्ध कार्यवाही कर तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक करने के साथ ही वेतन आहरण पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई है।
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रक्षाबंधन पर्व पर नाप-तौल विभाग का विशेष जांच अभियान, 11 प्रकरण दर्ज
गुना रक्षाबंधन पर्व के मद्देनजर नाप-तौल विभाग गुना द्वारा जिलेभर में विशेष जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान मिठाई, नमकीन सहित विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सघन जांच की गई।
जिले में कुल 36 मिठाई, नमकीन एवं अन्य संस्थानों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अनियमितताएं पाए जाने पर 11 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए। नाप-तौल विभाग ने बताया कि उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा एवं व्यापार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलेभर में इस प्रकार की जांच एवं कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
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जनता मालवा बैंड बड़नगर के संचालक के खिलाफ मामला दर्ज, ...350 क्वाटर सहित दो आरोपी गिरफ्तार
गुना। गुना शहर के कैंट थाना क्षेत्र में ईद-उल-मिलादुन्नबी के पावन अवसर पर बुधवार को निकले जुलूस के दौरान शासन की अनुमति और शर्तों का उल्लंघन करने वाले एक प्रसिद्ध बैंड संचालक पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कैंट थाने में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (ASI) गिर्राज जाटव ढोंगापुरा में जुलूस व्यवस्था ड्यूटी पर तैनात थे। इस दौरान जुलूस में शामिल 'जनता मालवा बैंड' (बड़नगर, उज्जैन) के संचालक द्वारा दी गई अनुमति की शर्तों का खुला उल्लंघन किया जा रहा था। बैंड संचालक अपनी गाड़ियों पर तय संख्या से अधिक बड़े साउंड बॉक्स लगाकर निर्धारित डेसिबल सीमा से काफी तेज ध्वनि में डीजे बजा रहा था। इसके अलावा, बैंड के ऊपर उपकरण लगाकर अग्नि प्रज्वलित (आतिशबाजी) की जा रही थी, जिससे जुलूस में शामिल लोगों और मानव जीवन को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।
ड्यूटी पर तैनात आरक्षक रवि जाट द्वारा की गई वीडियोग्राफी और साक्ष्यों की तस्दीक के बाद कैंट थाना पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया। पुलिस ने आरोपी बैंड संचालक के खिलाफ बीएनएस की धारा 223(1), 125(ए) और कोलाहल नियंत्रण अधिनियम की धारा 15 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
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दो आरोपी गिरफ्तार, 350 क्वाटर सहित अपाचे मोटरसाइकिल जप्त
गुना आरोन थाना प्रभारी निरीक्षक रविन्द्र सिंह सिकरवार और उनकी टीम द्वारा थाना क्षेत्र में अवैध शराब तस्करी के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए बाइक से शराब की तस्करी कर रहे दो आरोपी गिरफ्तार करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई है ।
गौरतलब है कि गत दिनांक 26 अगस्त 2026 को आरोन थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि ग्राम मूड़रा खुर्द की ओर से एक अपाचे मोटर साइकिल पर दो व्यक्ति प्लास्टिक के बोरे में शराब की पेटियां लेकर आरोन की ओर आ रहे हैं । थाना क्षेत्र में शराब तस्करी की सूचना को गंभीरता से लेकर कुछ ही समय बाद मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए की मोटरसाइकिल पर दो व्यक्ति आते दिखाई दिए । पुलिस को देखकर आरोपियों ने अचानक मोटरसाइकिल मोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दोनों को रोक लिया । पूछताछ में उनके द्वारा अपने नाम 1-शिब्बू पुत्र मुंशी केवट उम्र 22 वर्ष एवं 2-भानू पुत्र भोला केवट उम्र 23 वर्ष निवासीगण ग्राम खामखेड़ा थाना आरोन जिला गुना के बताए एवं उनके पास मौजूद प्लास्टिक के बोरे की तलाशी लेने पर उसमें 07 पेटियों में देशी मदिरा के कुल 350 क्वाटर बरामद हुए । पुलिस ने अवैध देशी मदिरा, तथा शराब तस्करी में प्रयुक्त अपाचे मोटरसाइकिल विधिवत जप्त कर आरोपियों के विरुद्ध आरोन थाने में अपराध क्रमांक 317/26, धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है ।

देश

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