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TATA Controversy: महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को नोटिस जारी किया (Maharashtra Charity Commissioner issue notice to Tata Trusts) है। चैरिटी कमिश्नर ने Tata Trusts से 12 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने ट्रस्ट्स के गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठाए थे। ने 24 सितंबर को वेणु श्रीनिवासन ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में गड़बड़ियों के आरोप वाली शिकायत की थी। इसपर अब महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को नोटिस जारी किया है।
बता दें कि टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमेन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) और टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमेन नोएल टाटा (Noel Tata) के बीच पावर को लेकर पिछले कई महीने से कोल्ड वॉर चल रहा है। नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन को दोबारा टाटा संस का चेयरमेन बनाने पर आपत्ति जताई है।
हालांकि मामले में उस समय नया ट्विस्ट आ गया, जब एन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा की लड़ाई में टाटा ट्रस्ट्स के जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन (venu srinivasan) कुद पड़े हैं। वेणु श्रीनिवासन ने एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को सही करार देते हुए (Tata Trusts) के चेयरमेन नोएल टाटा (Noel Tata) पर ही आरोपों की बौछार कर दी। सर रतन टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी और टाटा संस बोर्ड में उनके जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से ट्रस्ट के एडमिनिस्ट्रेशन और गवर्नेंस की तुरंत जांच करने की मांग कर डाली थी। उन्होंने गंभीर गवर्नेंस खामियों का आरोप लगाया है। साथ ही टाटा संस के मामलों में चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके ट्रस्टियों की भागीदारी पर चिंता जताई थी।
श्रीनिवासन के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स अब समाजसेवा के अपने मुख्य काम से भटककर कंपनियों के बिजनेस फैसलों में दखल दे रहा है। ट्रस्टी खुद बड़े कारोबारी सौदों को तय करने, बातचीत करने और उन्हें फाइनल कराने में लगे हैं, जो कि चैरिटी ट्रस्ट के नियमों के खिलाफ है। श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक नोएल टाटा कुछ खास फैसलों से खुद को अलग रखें। इनमें टाटा संस की आम बैठकों के लिए प्रतिनिधि नामित करना और कंपनी के बोर्ड में आर्टिकल 121 से जुड़े मामलों पर वोट करना शामिल है। उन्होंने जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की बैठकें, सर्कुलर प्रस्ताव और बोर्ड में बदलाव रोकने की मांग भी की है।
यह घटना चैरिटेबल ट्रस्ट्स के बीच गवर्नेंस और टाटा संस के बड़े शेयरहोल्डर के तौर पर श्रीनिवासन की भूमिका को लेकर बढ़ते तनाव को दिखाती है। टाटा ट्रस्ट्स के पास ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस की 66% हिस्सेदारी है। इसमें से, SDTT के पास टाटा संस में 27.98% और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के पास 23.56% हिस्सेदारी है, जो कुल मिलाकर 51.54% होती है।

इंदौर। साइबर ठगी के खिलाफ चल रही कार्रवाई में इंदौर से एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने देशभर के साइबर ठगों को ठगी के लिए तैयार APK फाइलें उपलब्ध कराईं। खजराना थाना पुलिस और मुंबई महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में पंकज पिता अवधेश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी इंदौर में रहकर साइबर ठगों के लिए फर्जी एप तैयार करता और उन्हें उपलब्ध कराता था। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में दावा किया गया है कि आरोपी ने करीब 2,905 APK फाइलें साइबर ठगी करने वाले गिरोहों को बेचीं। इन फाइलों के जरिए देशभर में करीब 9,673 लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। अब तक करीब 15.75 करोड़ रुपये की ठगी का पता चल चुका है। पुलिस को आशंका है कि वास्तविक ठगी की रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। आरोही पंकज मुल्तान नागदा का रहने वाला है।
जांच में सामने आया है कि पंकज ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं की और बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी। शुरुआत में वह गेमिंग ऐप तैयार करने का काम करता था। इसी दौरान उसने APK फाइल बनाने की तकनीक सीखी।बाद में उसका संपर्क साइबर ठगी करने वाले लोगों से हुआ और कथित तौर पर उसने इसी तकनीकी जानकारी को ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले ऐप बनाने में लगा दिया।पुलिस के अनुसार वह करीब तीन साल से साइबर ठगों को ऐसे ऐप उपलब्ध करा रहा था।
पूछताछ में आरोपी ने साइबर ठगी के एक तरीके के बारे में भी जानकारी दी है। साइबर ठग खुद को कभी SBI, HDFC या किसी अन्य बैंक का अधिकारी या मैनेजर बताकर लोगों से संपर्क करते थे।लोगों को कहा जाता था कि उनकी KYC बंद हो गई है या बैंक खाता जल्द बंद हो सकता है। इसके बाद उन्हें KYC अपडेट करने के नाम पर फर्जी लिंक या APK भेजी जाती थी।कई मामलों में QR कोड के जरिए भी लोगों को जाल में फंसाने की बात सामने आई है।
साइबर ठग कभी-कभी लोगों से कहते थे कि QR कोड पर 5 भेजकर अपना बैलेंस चेक कर लें। जैसे ही पीड़ित बताए गए तरीके से प्रक्रिया पूरी करता, उसके मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती थी।इसके बाद खाते से रकम निकालने या दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का खेल शुरू हो जाता था।यानी 5 का भरोसा और उसके बाद खाते से लाखों रुपये गायब।
पुलिस के मुताबिक पंकज खुद हर पीड़ित को फोन करके ठगी नहीं करता था। उसका कथित काम साइबर ठगों के लिए फर्जी APK तैयार करना था।इन APK को अलग-अलग सरकारी सेवाओं, बैंकिंग प्रक्रियाओं और वेरिफिकेशन के नाम दिए जाते थे, ताकि आम व्यक्ति उन्हें देखकर भरोसा कर ले।
इन नामों के पीछे छिपी APK फाइलों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को गुमराह करने और उनके मोबाइल से संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए किया जाता था।
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार आरोपी से जुड़े नेटवर्क ने करीब 2,905 APK फाइलें साइबर ठग गिरोहों को उपलब्ध कराईं। इनका इस्तेमाल कर करीब 9,673 लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।अब तक करीब ₹15.75 करोड़ की साइबर ठगी सामने आने का दावा किया गया है।जांच एजेंसी को आशंका है कि यह आंकड़ा अंतिम नहीं है और नेटवर्क की पूरी जांच के बाद ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।
इस कार्रवाई ने इंदौर में बैठे साइबर अपराध के एक अलग नेटवर्क की तस्वीर सामने रख दी है। आमतौर पर साइबर ठगी में फोन करने वाले ठग, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग और रकम निकालने वाले गिरोह सामने आते हैं।लेकिन इस मामले में ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले तकनीकी हथियार तैयार करने वाले व्यक्ति तक पुलिस पहुंची है।यही वजह है कि जांच अब केवल पंकज तक सीमित नहीं रहने वाली। पुलिस उन लोगों की तलाश भी कर रही है, जिन्होंने उससे APK खरीदीं और आगे उनका इस्तेमाल साइबर अपराध में किया।
पुलिस की जांच से सामने आए इस तरीके के बाद आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है—WhatsApp या SMS के जरिए आई किसी अनजान APK फाइल को डाउनलोड न करें।अगर कोई फाइल बैंक KYC, पेंशन, चालान, क्रेडिट कार्ड, सरकारी योजना या किसी वेरिफिकेशन के नाम पर भेजी जाए तो उस पर भरोसा न करें।
यह मामला सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर अपराध के बदलते तरीके की तस्वीर भी सामने लाता है। अब ठगों को खुद तकनीकी ऐप बनाने की जरूरत नहीं- ऐसे लोग उनके लिए फर्जी ऐप तैयार कर उपलब्ध करा रहे हैं। इंदौर से पकड़े गए आरोपी से पूछताछ के बाद अब पुलिस की नजर उन साइबर गिरोहों तक पहुंचने पर है, जिन्होंने इन APK फाइलों का इस्तेमाल किया। 2,905 APK, 9,673 संभावित पीड़ित और 15.75 करोड़ की सामने आई ठगी- इन आंकड़ों ने साइबर अपराध के उस नेटवर्क की गंभीरता जरूर उजागर कर दी है, जिसका अगला सिरा अब देशभर के ठग गिरोहों तक पहुंच सकता है।

नीमच में आज बुधवार अचानक एक फर्नीचर फैक्ट्री में आग धधक उठी, देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया, सूचना पर पहुंचीं फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग पर काबू करने का प्रयास शुरू किया, आग से फैक्ट्री में रखा फर्नीचर जलकर ख़ाक हो गया, फैक्ट्री संचालक ने करीब 5-6 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है। आग लगने का स्पष्ट कारण तो जाँच के बाद मालूम चल सकेगा लेकिन फैक्ट्री संचालक ने शॉर्ट सर्किट होने का अनुमान जताया हैं।
नीमच के पीजी कॉलेज के पीछे कृषि विज्ञान केंद्र के पास स्थित DV Distribution Services की फर्नीचर फैक्ट्री में दोपहर करीब 12:30 बजे भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा चपेट में आ गया। फैक्ट्री स्टाफ ने आसपास के लोगों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियाँ मौके पर पहुंची चूँकि फैक्ट्री बड़े हिस्से में फैली थी और आग चारों तरफ फ़ैल चुकी थी इसलिए दीवारों को तोड़ने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी उसके बाद पानी की धार आग पर पहुंचाई गई, सूचना मिलते ही कुछ देर पहले ही फैक्ट्री से गए संचालक वापस लौटे।
मीडिया से बात करते हुए फैक्ट्री संचालक दीपक भंडारी ने बताया की वे जब यहाँ से गए तब सबकुछ ठीक ठाक था अचानक आग कैसे लगी समझ नहीं आ रहा उन्होंने शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई है, भंडारी के मुताबिक फैक्ट्री में करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये का तैयार स्टॉक था और लगभग 3 करोड़ रुपये की मशीनरी थी। करीब 30 हजार वर्गफीट का शेड भी आग की चपेट में आकर लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गया। संचालक ने कुल नुकसान 5 से 6 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान बताया है। आग लगने की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है, हालांकि संचालक ने शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई है।

गुना /ग्वालियर। गुना विधानसभा की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) देवेश उपाध्याय की अदालत ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा, किरण जैन और हरवीर सिंह उर्फ मिंटू को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
अभियोजन के अनुसार राजेंद्र सिंह सलूजा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि वर्ष 2008 में उन्होंने अपनी वास्तविक जाति छिपाकर स्वयं को सांसी अनुसूचित जाति का बताते हुए जाति प्रमाण पत्र हासिल किया और इसका इस्तेमाल गुना विधानसभा की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के उद्देश्य से किया। मामले में किरण जैन और हरवीर सिंह उर्फ मिंटू पर भी कथित रूप से षड्यंत्र में शामिल होने तथा प्रमाणिकरण और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के आरोप लगाए गए थे।
प्रकरण में राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जांच समिति की रिपोर्ट भी पेश की गई थी। समिति ने राजेंद्र सिंह सलूजा के सांसी जाति से संबंधित होने और वर्ष 1950 से मध्यप्रदेश का निवासी होने के संबंध में प्रस्तुत दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना था। समिति ने 8 अगस्त 2008 को जारी सांसी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर उसे राजसात करने का निर्णय लिया था। हालांकि, अदालत ने मामले में पेश किए गए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद अभियोजन के आरोपों को प्रमाणित नहीं माना। अदालत ने निष्कर्ष में राजेंद्र सिंह सलूजा को धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के आरोपों से तथा किरण जैन और हरवीर सिंह को उनके खिलाफ लगाए गए संबंधित आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपियों की ओर से प्रस्तुत बंधपत्रों को छोड़कर शेष जमानत मुचलके मुक्त किए जाएं। तीनों आरोपी मामले की सुनवाई के दौरान पहले से जमानत पर थे।
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ट्रैक्टर लेकर घूम रहे थे दो युवक, अशोकनगर पुलिस ने पकड़ा तो खुला गुना का राज
गुना। अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने में मध्य प्रदेश की अशोकनगर पुलिस ने एक बार फिर अपनी मुस्तैदी का लोहा मनवाया है। गुना जिले के केंट थाना इलाके से चोरी किया गया ट्रैक्टर पुलिस की सतर्कता के चलते महज तीन दिनों के बीतर बरामद कर लिया गया है। शाढ़ौरा थाना पुलिस ने घेराबंदी कर दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है, जो चोरी के इस ट्रैक्टर को ठिकाने लगाने की फिराक में घूम रहे थे। आरोपियों के पास से ये चोरी का ट्रैक्टर भी बरामद कर लिया है।
बताया जा रहा है कि, 2 अक्टूबर 2026 को गुना शहर के जीके गार्डन के पास रहने वाले शशिभूषण पुत्र ओमप्रकाश रघुवंशी के घर के बाहर से उनका ट्रैक्टर अचानक गायब हो गया था। काफी तलाश के बाद भी जब सुराग नहीं मिला तो उन्होंने गुना केंट थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात चोरों के खिलाफ धारा एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
गुना पुलिस चोरों की तलाश कर रही थी, इसी बीच इस चोरी का इनपुट अशोकनगर जिले के शाढ़ौरा थाना प्रभारी निरीक्षक सुनील सिकरवार को मिला। एसपी राजीवकुमार मिश्रा ने तुरंत एक्शन लेने के निर्देश दिए। सूचना मिली कि गुना से चुराया गया ट्रैक्टर नईसराय फाटक के पास देखा गया है और संदिग्ध उसे लेकर घूम रहे हैं। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर ट्रैक्टर सहित दो संदिग्ध युवकों को पकड़ा।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान सोनू कोरी निवासी छेलाबाग कैलामाता मंदिर के पास अशोकनगर) और साहिल कोरी निवासी फरदाई के रूप में हुई। जब पुलिस ने पूछताछ की, तो दोनों ने ट्रैक्टर चोरी की वारदात को कबूल कर लिया। शाढ़ौरा पुलिस ने दोनों आरोपियों को चोरी के इस ट्रैक्टर के साथ गुना केंट पुलिस को सौंप दिया है।
अंतर-जिला वाहन चोरी के इस अहम खुलासे में थाना प्रभारी शाढ़ौरा निरीक्षक सुनील सिकरवार, एएसआइ मनीराम जाटव और प्रधान आरक्षक महावीर ओझा की मुख्य भूमिका रही।
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पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने 8 और 9 अक्टूबर को विशेष कैंप, 2.50 लाख के गांजा सहित दो तस्कर गिरफ्तार
गुना। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश संजीव कुमार झा ने मंगलवार को उप जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ निर्वाचन सदन भोपाल से वर्चुअल बैठक की। इस दौरान उन्होंने पूरे प्रदेश में 7, 8 और 9 अक्टूबर को पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए प्रदेश के प्रत्येक मतदान केंद्र में विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिविर के दौरान किसी भी मतदाता से फार्म 6 के अलावा घोषणा पत्र नहीं लिया जाएगा। सभी जिला उप निर्वाचन अधिकारी यह सुनिश्चित करें। इसके साथ ही उन्होंने व्यापक स्तर पर प्रचार प्रचार करने के निर्देश दिए।
श्री झा ने कहा कि जिन युवाओं की उम्र 1 अक्टूबर को 18 वर्ष की है गई, उनके भी फॉर्म लिए जाएंगे। इसके साथ ही 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए एडवांस में फॉर्म जमा कराए। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए ऑनलाइन की सुविधा भी प्रदान की गई है। कोई भी मतदाता voters.eci.gov.in पर अथवा ECINET mobile app पर जाकर अपना नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। श्री झा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से कहा की वे इस ऑनलाइन प्रक्रिया को व्यापक रूप से प्रचारित करें और युवा मतदाताओं को खास तौर पर ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुए अब तक के कार्यों की समीक्षा भी की। इंदौर तथा विदिशा में अच्छी प्रगति के लिए सराहना की। जो जिले इस कार्य में पिछड़े हैं उन्हें प्रगति के निर्देश दिए। गुना जिला कलेक्ट्रेट के एनआईसी कक्ष में वर्चुअल बैठक के दौरान उप जिला निर्वाचन अधिकारी गुना देवांशु शिवहरे, इलेक्शन सुपरवाइजर विजय माथुर, जनसंपर्क विभाग से सुश्री कनिका गुप्ता उपस्थित रहे।
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2.50 लाख के गांजा सहित दो अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार
गुना मृगवास थाना पुलिस द्वारा नशे के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करते हुए करीब 2.50 लाख मूल्य के गांजा सहित नशे के दो अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की गई है ।
गत दिनांक 06 अक्टूबर 2026 को मृगवास थाना अंतर्गत सानई चौकी पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि मृगवास-चांचौड़ा रोड स्थित ग्राम पीपलहेडा तिराहे पर दो व्यक्ति अवैध मादक पदार्थ गांजा लेकर उसे बेचने की फिराक में खडे हुए हैं । थाना क्षेत्र में गांजा तस्करी एवं विक्रय की सूचना को पुलिस द्वारा गंभीरता से लेकर मुखबिर द्वारा बताए हुलिया अनुसार दो व्यक्ति खडे हुए दिखाई दिए । जिन्होंने पुलिस फोर्स को देखते ही वहां से भागने का प्रयास किया लेकिन पुलिस फोर्स द्वारा तत्परता दिखाते हुए मौके की घेराबंदी कर उन्हें धर दबोच लिया गया । पूछताछ पर उनके द्वारा अपने नाम गरीब सूना पुत्र गोजा सूना उम्र 40 वर्ष निवासी ग्राम खलिया थाना पटनावड़ जिला बलांगीर (उड़ीसा), एवं गुणसागर पुत्र हिरण्या टांड़ी उम्र 25 वर्ष निवासी ग्राम वनमाल थाना पटनावड़ जिला बलांगीर (उड़ीसा) के बताए । मुखबिर सूचना के आधार पर उनकी विधिवत तलाशी लेने पर उनके पास रहे प्लास्टिक के कट्टे से 5.084 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा कीमती 2.50 लाख रुपये का बरामद हुआ, जिसे पुलिस द्वारा विधिवत जप्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके विरुद्ध मृगवास थाने में अपराध क्रमांक 121/26 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है । पुलिस द्वारा आरोपियों के गांजा तस्करी के अन्य संभावित नेटवर्क, स्त्रोत एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों के संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है ।
गिरफ्तारशुदा दोनों आरोपीयों को पूर्व में भी गांजा तस्करी के मामले में मृगवास थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है, जिन्हें, दिनांक 26 मई 2026 को उनके अन्य साथियों के साथ अवैध मादक पदार्थ गांजा की तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया गया था । इस संबंध में आरोपियों के विरुद्ध मृगवास थाने में अप.क्र. 56/26 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था ।

 

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TATA Controversy: महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को नोटिस जारी किया (Maharashtra Charity Commissioner issue notice to Tata Trusts) है। चैरिटी कमिश्नर ने Tata Trusts से 12 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने ट्रस्ट्स के गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठाए थे। ने 24 सितंबर को वेणु श्रीनिवासन ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में गड़बड़ियों के आरोप वाली शिकायत की थी। इसपर अब महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को नोटिस जारी...
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